नमस्कार दोस्तों, दोस्तों, इंसान अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में थोड़ा सुकून पाने के लिए हमेशा से मनोरंजन का सहारा लेता रहा है। बदलते वक़्त के साथ साथ भले ही मनोरंजन के साधनों नए नए तकनीकों ने जगह बना ली हो पर नाट्य मनोरंजन का स्थान आज भी बरकरार है। मानव संस्कृति के विकाश के शुरआती दौर में जब तकनिकी विकाश अपनी प्रारंभिक चरण में था और टेलीविज़न का अविष्कार नहीं हुआ था तब भी मनोरंजन के लिए नाट्य प्रस्तुति इंसानों की पहली पसंद हुआ करती थी। पर जब सिनेमा का अविष्कार हुआ तो इसी नाट्य प्रस्तुति ने सिनेमा का रूप ले लिया। अब मनुष्य अपने अभिनय और प्रस्तुति को हमेसा के लिए सिनेमा के माध्यम से सहेज कर रख सकता था। अभिनय के प्रारंभिक दौर में केवल पुरुष ही अभिनय किया करते थे और महिला का किरदार भी निभाया करते थे तब बोलती फिल्मों की शुरुआत नहीं हुई थी और केवल मूक फिल्मों से ही मनोरंजन किया जाता था। पर तकनीक ने रफ़्तार पकड़ी और मूक फिल्मों की शुरुआत के कुछ ही वर्षों बाद बोलती फिल्मों की तकनीक का ईजाद हो गया। तब भी मौजूदा संस्कृति में महिलाओं को फिल्मों या नाटक में अभिनय की अनुमति नहीं थी। पर...