नमस्कार दोस्तों, दोस्तों, जीवन में आने वाली उतार-चढाव, हार-जीत, आशा-निराशा, कामयाबी और नाकामी ये सभी इंसान के जीवन का एक अहम् हिस्सा है। इनमे से कुछ भी हमेसा नहीं रहता। न तो खुशी हमेसा रहती है और न ही गम। हम जीवन के हम इम्तेहान में सफल हों जरुरी नहीं इसका दूसरा मतलब यह भी है की हमें हमेसा हार का ही सामना नहीं करना पड़ेगा और हम जीवन के कुछ इम्तेहानों में सफल भी होंगे। दोस्तों जीवन में कुछ मोड़ ऐसे भी आते हैं जब इंसान अपने जीवन के संघर्ष में लगातार मिल रही असफलताओं से मानसिक अवसाद म चला जाता है और कई बार तो अपना यह कीमती जीवन भी ख़त्म करने की गलती कर बैठता है। पर ऐसा करने वाला शख्स यह भूल जाता है की मनुष्य के जीवन में कोई भी उपलब्धि या नाकामी स्थिर नहीं रहने वाली। परिवर्तन ही समय का एकमात्र स्थाई भाव है। पर अपनी असफलताओं से मानसिक अवसाद झेल रहा व्यक्ति इस सत्य को समझ नहीं पाता और कुछ ऐसा कर बैठता है जिसे कभी भी सही नहीं कहा जा सकता। यदि जीवन में कभी भी इस तरह की निराशा जनक परिस्थितियों का सामना करना पड़े तो हमारी हिंदी सिनेमा जगत की इन पांच फिल्मों को एक बार जरूर देख लेना चाहिए। क्...